Mere dil mein…❤️

मेरे दिल में समाया है तू इस तरह से
धागों में मोती पिरोए जिस तरह से
तू आजा सितम ना ढा मुझ पे जाना
मैं मर ही गया हूं एक तुझ पे जाना
करम ऐसा करदे दुआओं के बदले
बदले सारा ज़माना इक तू ना बदले
तेरे दिल में मेरा भी इक अरमां होगा
मेरी धड़कनें बिन वजह यूं ना धड़के
है कैसी जुदाई मेरे दिल को तड़पाए
मर ही ना जाऊं सांसे रुक रुक जाए

तुम मुझे ढूंढने..

तुम मुझे ऐसी खाई में फेंक आए हो जहां मुझे जानवर नोच के खा गए हैं
तुम मुझे ढूंढने आए हो खुदको शर्मिंदा करने आए हो

प्रतिक्षा

दिल की ये जो
मझधार है
तुम्हारे प्यार के नाव की
प्रतिक्षा में
सूखते ही जा रही
हृदय में जो तूफान
उठते हैं
तुम्हारी यादों के
इन्हें तुम्हारी बाहों
और
किनारों की तलाश है
कबसे पलकें बिछा
रखी हैं
हर एक पथ पर
कहीं से तो आओगे
और मेरी सूनी
निगाहों में
प्यार के लम्हों को
सजाओगे

तुम याद करोगे जब मुझे 💝

तुम याद करोगे जब मुझे
मैं याद आऊंगा इस तरह
तेरी जिस तरफ भी हों नज़र
मैं नजर आऊंगा इस तरह
तुम खुदको भूलकर जी भी लो
मुझे भूलकर जीया ना जा सके
तेरी घड़ी भर जो आंख लगे
मैं ख्वाबों में आऊं इस तरह
तुम सुंदरता की इक मूरत हो
तेरा मन भी सुंदर चंचल सा
में सांसों पे तेरा नाम लिखूं
तेरी इबादत करूंगा इस तरह

कद्र..

मुझे मेरी अब कोई फ़िक्र नहीं
तुझे भी तो मेरी कोई कद्र नहीं
मेरी मंज़िल पे मुझे जाना अब
मुझमें ठहरने का कोई सब्र नहीं

दूरी बहुत बढ़ी ..

दूरी बहुत बढ़ी खुद से तेरे करीब रहते हुए
दुनिया पराई हो गई तुझे हबीब कहते हुए
तुमसे मिलना तो मेरी किस्मत की बात थी
जुदा हुए क्यूं हम अर्श पर नसीब रहते हुए
दुआएं लगी इस दीवाने को ज़माने की सदा
ना मर सका ये कभी सांसें सलीब रहते हुए
होश में आ जाएगा आंखों का जाम दो जरा
फना हुए कईं आशिक़ हज़ारों तबीब रहते हुए

Bas saare din…

बस सारे दिन
कट जाएं
कटती ना ये रातें,
हां तेरे बिन
हों जाएं
आंखों से बरसातें,
तन्हाइयों के
इस सफर में मेरा
दिल है,.
इक मौत के सिवा
ना मेरी
कोई मंज़िल है.,
मेरी हर एक
सांस की तबाही तू,.
इश्क़ की एक
हां दे दे गवाही तू,
फितरत में
दिल के टूटना मेरी जाना,,.
तोड़ने वाला
तो मासूम है मैंने माना

माटी का पुतला 📿

मैं तो एक माटी का पुतला हूं
और वक़्त की धूप में जला हूं
निरंतर गिरती उम्र की ये रेत
फिर धूल में ही जाके मला हूं
रुकती नहीं है सुई ज़िन्दगी की
ना ही मैं ज़ख्म अपने सिला हूं
फूलों की चाह में जाने कहां तक
हर वक़्त बस कांटों पे चला हूं
दर्द सहता और मुस्कुराता रहता
बस वही पागल सी मैं बला हूं

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